#Kavita by Jayati Jain Nutan

कविता – जीवन की दौड़ ।

 

भागती दौड़ती जिंदगी

कुछ पाने की तलाश में

आज फिर दौड़ रही है

पटरियों पर

अपने गंतव्य की ओर ।

 

सैकड़ों मिले बिछड़े

कुछ अनसुने किस्से

कानों में गूंज उठे

बच्चों की किलकारी की तरह

कुछ समझाने की कोशिश में ।

 

अलग अलग मंज़िलों के मुसाफिर

टकराते हैं जब राह में

कुछ नए रिश्ते जुड़ते हैं

कुछ नए सपने सजते हैं

आंखें नम भी कर जाते हैं

जब आगे पीछे हो जाते हैं ।

 

जितनी कोशिशें मिला उतना ही

स्वप्न आखों से नहीं जाते

कामयाब हुए तो हसरतें पूरी

नहीं तो ताने सुन कभी कभी

नाकामयाबी का चादर

ओढ़ सो जाते हैं ।

 

लेखिका – जयति जैन “नूतन” , भोपाल ।

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