#Kavita by Jitendra Kariya ‘ jeetu musafir’

 

लीला कुर्सी की होती है अपरंपार ,

छोटे बड़े सभी नेताओं को है इससे प्यार ।

 

चार टांगो वाली इस नायाब चीज को पाने ,

चार टांगो वालो सी हरकत करने रहते है तैयार ।

 

चुटकी मे चिपकाये या जोड़ हो फेविकॉल का ,

सभी की प्रेरणा बने है इस कुर्सी के यार ।

 

कहने को हैसियत मामूली रहने कमरे दो ,

देश में खाली तिजोरी विदेश मे दौलत बेशुमार ।

 

जीवन शैली साधारण सेवा करने का शौख ,

और पैदल चलने मे दुष्वारी चाहिए हमेशा कार ।

 

अपनी बुद्धि का हमने जो ना किया उपयोग हमने ,

इन्हें दोष देना है व्यर्थ और बेकार ।   –  जीतू

 

 

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