#Kavita by Jyoti Chouhan

दिल अगर चाहता है तो रुक,,
“हसरतें” पूरी कर उसकी
कि दिल बार बार नही चाहता।।

जीवन की इस धूप छाँव में,
परिवर्तन की बहती धारा में,
कुछ ऐसा कर जो चाहे दिल
कि दिल बार बार नही चाहता।

ग़र तू चाहे पंछी बन , उडू नभ में
या बनू ईश, बस जायें जो मन में
या बन जाउ परी, सँवारे जो जिंदगी।

चाहता है दिल….. सागर बन शांत करु तृष्णा
या खिल जाऊ मुस्कान बन लबों की लाली पर।

चाहती हूं…..
नव-सृजन की नींव रखना,
जीवन के अँधियारो से निकल ,
प्रकाश का प्रसार करना,,
बेमानी ताकतों को मात कर,,,
बादलो सा पीर दूर कर
नव -जीवन का आगाज़ करू,,
और करू “हसरतें” पुरी दिल की
कि दिल बार बार नही चाहता,,,।

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