#Kavita by Jyoti Mishra

कौन कहता है कि तुम मेरी बाहों में रहो

जाओ चाहे दूर जितना, बस निगाहों में रहो

दर्द जितने भी दो, हंसकर सह लेंगे हम

शर्त  इतनी सी है, मौजूद़ मेरी आहों में रहो …

 

चाहो जिसको उससे कुछ भी न चाहो ए दिल

मुनासिब है नहीं के तुम भी उसकी चाहों में रहो

फूल बेशक बिछाओ राहों में उसके

पर कांटे बनकर नहीं उसके मुकामों में रहो …

 

हर सांस ये कहती है, तुम मेरी दुआओं में रहो

दिल को सुकून है, जो तेरी पनाहों में रहो

मंदिर -मस्जिद न भटकेंगे, के मेरा खुदा तू है

आरती में तुम हो, तुम ही अजानों में रहो …

 

ज्योति मिश्रा

पटना

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