#Kavita by A K Mishra

फलक के ऊपर भी इक जहां है।

उम्मीदों का जमीं पे ही आसमां है।।

 

जज्बा हो गर साहिल छूने का।

तो कस्ती में भी उड़ान यहाँ है।।

 

मतलबी ज़माना बड़ा शातिर है।।

दूसरों के लिए बनता नदां है।

 

खुश  कौन है ज़मी पे आके ‘कुमार’।

खुदा से पूछो वो भी परेशां है।।

 

अंजनी कुमार मिश्रा

162 Total Views 3 Views Today
Share This

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *