#Kavita by Kamlesh Joshi

भोर हुई,छोड दो आलस, अब निद्रा को जाने दो
आने को बसंत आतुर है, अब उसको आने दो …

मौसम ने करवट बदली, कुदरत ने श्रृंगार किया
रंग भरे है कलियों में नव, फूलों को खिल जाने दो..

उजास नया है जीवन का, तम का मलमास गया
सूरज ने पथ साध लिया, नव किरणें बिखराने दो ..

नव पलाश पुलकित पल्लव, प्रसन्न प्रियतम प्रिया
नेह नीरज नव नूपुर नयन, निखार बढ जाने दो …

मंजुल मंजरियां महकी, मंद मंद अ्ब बयार चली
महका महुआ मदमस्त हो, मदहोशी चढ जाने दो..

……..कमलेश जोशी कांकरोली राजसमंद…

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