#Kavita by Kamlesh Joshi

आंसू भीतर ही रहना

व्यर्थ आंखों में बहना

कौन समझेगा तुझको

और किसको है कहना ….

 

यहां सबकी कहानी है

और अपनी परेशानी है

कौन सुनता औरों की

दुनिया बडी सयानी है …..

 

तुम आंखों मे जो बहोगे

बस एक तमाशा बनोगे

जग को तेरे गम से क्या

आखिर एकाकी रहोगे….

 

अच्छा भीतर रह जाओ

या अकेले मे बह जाओ

उतर आओ शब्दों मे या

शायद मन की कह पाओ……

 

………..कमलेश जोशी कांकरोली राजस्थान

 

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