#Kavita by Kanchan Sahu Kritika

 

दिखे गर पास मंजिल तो

खुशी से झूम लेती हूँ

दुआएं ले बुजुर्गों की मै

दुनिया घूम लेती हूँ

ये मंदिर और मस्जिद तो

नहीँ पथ में मेरे लेकिन

इबादत में महज तस्वीर

माँ की चूम लेती हूँ

 

-कंचन कृतिका

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