#Kavita by Kapil Jain

शुक्रिया जिन्दगी
शुक्रिया ज़िंदगी
आज मेरी उम्र ने एक कदम और बढाया है,
जो भी जीवन पथ पर मिले उन सभी का
शुक्रिया अदा करता हूँ, जीवन में बहुत
स्नेह मिला है, ठोकर भी बहुत खाई,
क्या हुआ जो कुछ चोटें और घाव लगे,
इन ठोकरों ने ही सही मायने में जीना सिखाया,
फिर भी आज जब जीवन का बही खाता निकाल
कर देखा तो स्नेह, अपनत्व और दोस्तों का पलड़ा
भारी था!

जिन्होंने मुझे
स्नेह दिया
उनका तहे दिल से
शुक्रिया,
जो खेले
मेरी भावनाओं से
और जिन्होंने
जख्म दिए
उनका भी शुक्रिया,
उम्र यूँ ही गुज़र जाएगी
बीता हुआ
हर एक लम्हा
याद आएगा ,
बीते हुए लम्हों को
जब आईने में
देखता हूँ
रंग बिरंगी सी
तस्वीर उभर कर आती है,
कहीं कहीं
कुछ धब्बे ज़रूर हैं
कुछ घाव
और चोट के
निशान भी हैं
और संघर्ष की
दास्तान है,
पर फिर भी
बहुत हसीन लम्हों में
सिमटी है..
जिन्दगी तेरा शुक्रिया…

कपिल जैन

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