#Kavita by Kapil Jain

दिन नरम है अब

और रातें ठण्डी

सुना है

सूरज को लग गया है

प्रेम रोग

बरसता है दिन भर

उषा की माँग में

जमने लगा है सिन्दुर

आसमां रहने लगा है ख़ामोश

रात बरस कर ढक लेती है

भोर का आँचल

चाँद ताकता है रातभर

बदल रहा है मौसम शायद

वक्त के बयार की तासीर

दे रही है बारिश की दस्तक..

 

 

कपिल जैन

 

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