#Kavita by Kapil Jain

इक कब्र के अंदर
सूरज की लाश मिली
काले कपड़ों में रोयी रात ……
दफनाने के एवज़ में
नभ ने मांगी शर्त की धार पर
हँसते-किलकारते तारे
लकड़ी आई जले जिस्म से
लेकर सुर्य अग्नि प्रवाह
अपने कपड़े उतार
मैं फिर से नहाया…..
तब जाकर हुआ प्रभात …..
कपिल जैन

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