#Kavita by Karan Sahar

!! ज़िंदगी !!

 

सुना है

तुम सितारे चुनते हो

मुझे भी दो ना

चंद टुकड़े सितारों के,

मैं यहाँ ज़मीन पर से

काली रातों को भगाना चाहता हूँ,

सदियों से सो रहे जुगनुओं

को फिर से जगाना चाहता हूँ ।।

 

सुना है

तुम हवाओं से बातें भी कर लेते हो

हवा से कहो ना

के पास वाले गांव में

कुछ फूल खिले हैं

कुछ खुशबू हमारे यहाँ भी कर दे

हमारे खेतों को अनाज से न सही

पर किन्हीं उम्मीदों से भर दे ।

 

सुना है

बारिशें तुम्हारा कहा मान लेती हैं

बस एक बार

बारिशों से पूछो तो

के हमारे लहू को धोने की ख़ातिर

वो ना बरसी, ना ही सही

पर अब इन आँसुओं को छुपाने ख़ातिर

वो बरसेगी या नहीं ।।

 

सुना है

कि तुम एक बार किसी का हाथ छोड़ दो

तो वो शख्स हमेशा को भटक जाता है,

रहने दो अब मना मत करो

मैं जानता हूँ, तुम ही ज़िंदगी हो,

ज़रा मेरे हाथों की पकड़ ढीली करो ना

मैं भी तुमसे दूर भटकना चाहता हूँ

बहुत जी लिया इस डोलती जमीं पर

अब जरा शांत हवा में लटकना चाहता हूँ ।।

 

-सहर

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