#Kavita by Karan Sahar

!! तोहफा !!

 

तुम्हें याद है

जब हम साथ हुआ करते थे

मैंने एक तोहफ़ा मांगा था तुमसे

कि तोहफ़े में

तुम मेरी लिखी किताब के

आखिर के सफेद पन्ने पर

अपने ग़ुलाबी होठों से

चुम्भन के निशान दोगी ।।

ख़ैर

ये तोहफ़ा तो मयस्सर न हुआ मुझे

मग़र

मैं ये उम्मीद करता हूँ

कि तुम्हें ये सब याद होगा

मैं ये उम्मीद करता हूँ

कि वो सब

तुम्हारे दिल में भी आबाद होगा ।।

 

#करन_सहर

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