#Kavita by Karan Sahar

समझदारी इसी में है

कि मैं अपनी गलती मान जाऊं

और उस के बाद

इस भूल को फिर न दोहराऊं ।।

 

भलाई इसी में है

कि मेरे हिस्से की सज़ाएं

मेरे हक में ही रहें,

किसी मासूम पर

अब और दिक्कतें न आनी पाएं ।।

 

अच्छा यही होगा

कि मैं वक्त रहते सुधर जाऊँ,

वरना स्त्री शक्ति ख़ुद ही

मुझे और मेरे अंदर के राक्षस को

हमेशा के लिए मिटा देंगी ।।

 

बहुत अच्छा होगा

अगर मैं कुदरती नियम

और इंसानियत का लिबास पहन लूँ,

वरना मुझे इंसान

कहलाने का हक़ ही नहीं होगा ।।

 

#करन_सहर

 

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