#Kavita by Karan Sahar

!! यादों के परिंदे !!

 

तुम्हारी यादों के परिंदे

मेरे दिल के छप्पर पर

हर रोज़ ही आ कर

अपनी नुकीली चोंच से वार करते हैं,

मैं बहुत परेशान हूँ

तुम्हारी यादों के

इन ज़ालिम परिंदों से ।।

 

अब जो मैंने अपने दिल मे झांक कर देखा

तो हैरान था ये देख कर

कि इन परिंदों ने तो

मेरे दिल के छप्पर पर

अपना घोंसला ही बना रखा है ।।

 

तब से हर रोज़ मैं यूँ ही

तुम्हारी यादों के इन परिंदों को

उम्मीद के दो चार दाने खिला आता हूँ,

यही सोच कर

के शायद तुम ही कभी आओ

और इन परिंदों को यहां से आज़ाद कर दो ।।

 

#करन_सहर

 

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