#Kavita by Karan Sahar

!! एक नज़्म !!

 

रात भर एक उम्र का तिनका

चुभता रहा मेरी आँखों में,

वैसे तो आँखें लाल होनी चाहिए थीं

मगर इस तिनके ने तो

हजारों रंग दिखा दिए मुझे।।

 

तेरी खामोशी में दबी कड़वी बातें

मेरे दिल को जला रही हैं,

वैसे तो कड़वी बात कड़वी ही होनी चाहिए थी,

मगर इन बातों ने तो

कई  ज़ख्मों के स्वाद चखा दिए मुझे ।।

 

पतझड़ आते ही पत्तों का शाख से उतरना

बहुत आम सा सिलसिला लगता है

वैसे तो आम बातों पर कौन ग़ौर करता है

मगर इन पत्तों ने तो

ज़िन्दगी के सिलसिले सिखा दिए मुझे।।

 

#करन_सहर

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