#Kavita by Karan Sahar

!! हम रहें या ना रहें !!

 

तुम हमेशा ही रहोगी

मेरी साँसों के दरमियाँ,

फिर तुम्हारी साँसों में

हम रहें या ना रहें ।।

 

मेरी आँखों में भरना उतरना

तुम्हारे लिए तो लाज़मी होगा,

फिर तुम्हारी आँखों पर से

हम बहें या ना बहें ।।

 

तुम अपनी खुशी के मंज़र

हर हाल में बयाँ करना,

फिर अपने ज़ख्मों के बारे में

हम कहें या ना कहें ।।

 

तुम हमेशा के जैसे ही

हमारी रूह पर वार करो,

फिर वहां से उठते दर्द

हम सहें या ना सहें ।।

 

ये हमारा इश्क है

हो तो मुकम्मल जाएगा,

चाहे फिर इस दास्ताँ में

हम रहें या ना रहें ।।

 

-करन “सहर”

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