#Kavita by Karan Sahar

!!तेरी तस्वीर जब देखता हूँ ना !!

तेरी तस्वीर जब देखता हूँ ना
कमज़ोर पड़ जाता हूँ अपने आप मे ही,
नाकाम हो जाते हैं
सारे इरादे तुझे भुला देने के,
और मिन्नतें करने लगती हैं
तेरी यादें
मेरे ज़हन में फिर से आ जाने के लिए ।

तेरी तस्वीर जब देखता हूँ ना
महसूस करना छोड़ देता हूँ हवाओं को,
लगता ही नहीं कि मैं
साँसे भी ले रहा हूँ,
बस लगता है जैसे
तेरी खुशबू ने ही ज़िंदा रखा है मुझ को ।

तेरी तस्वीर जब देखता हूँ
तो कभी लगता ही नहीं
कि तुम समंदर के दूसरे किनारे में हो
और मैं दूसरे किनारे में,
लगता ही नहीं कि जितने करीब थे हम
उतने ही अब फाँसले हो गए हैं ।

तेरी तस्वीर जब देखता हूँ
मन करता है भूल जाऊँ सब कुछ,
भूल जाऊँ कि जो भी सितम हुए
भूल जाऊँ जैसा भी मंज़र देखा
और सब भूल भाल कर
वापिस लिपट जाऊँ तेरी बाहों में ।

तेरी तस्वीर जब देखता हूँ ना….
ख़ैर छोड़ो
अब कोशिश करूँगा
कि तेरी तस्वीर ही ना देखूँ ।

#करन_सहर

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