#Kavita by Karan Sahar

बड़ी बेतुकी सी बातों का

हवाला दे कर

वो मेरे हाथों से ज़िन्दगी का

एक टुकड़ा ले गया ।

 

बिना मेरी इजाज़त के

बिना मुझ से पूछे

वो मेरी साँसों से

जीने की तक़मन्ना ले गया ।

 

बड़ी नाराज़गी भारी

और गुस्साई हुई आँखों में लपेटकर

वो मेरे आँखों का

एक नज़ारा ले गया ।

 

वो जितना करीब था मेरे

मेरी सब हकीकत जानता था

जाते जाते वो मेरा

किस्सा ले गया ।

 

मेरे दिल का आखिरी खज़ाना

तो वो शख्स खुद ही था

अब अपने ही नाम पर

वो जाने क्या क्या ले गया ।

 

मैं जलता रहा था

जुदाई की रात से अब तलक

और वो नादान बंदा

मेरा धुंआ ले गया ।

 

मैं हैरान था जब देखा

कि मैं तो मौज़ूद हूँ

मगर रोशनी में मुझे चीरता हुआ

मेरा साया नहीं नज़र आ रहा,

मुझे तो तभी मालूम हुआ

वो मेरा साया ले गया ।

 

जाने को तो जाने वाला

अकेला ही गया था

मगर अब गौर से देखा तो

वो मेरी सारी दुनिया ले गया ।

 

-सहर

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