#Kavita by Kashan Iqbal Pahlwan

मुहब्बत काँच का सौदा..

मुहब्बत आग का दरिया..

 

मुहब्बत जून जैसी है..

मुहब्बत बर्फ का गोला..

 

मुहब्बत रात काली है..

मुहब्बत नीला मौसम है..

 

मुहब्बत कच्चा आँगन है..

मुहब्बत तितलियों का घर..!!

 

मगर फिर भी,

मुहब्बत काँच का सौदा..!!

 

किसी नामालूम बस्ती से..

किसी अनजान हस्ती से..

किसी कागज की कश्ती से..

 

किसी खिड़की के मंजर से..

किसी पत्थर के खंजर से..

 

किसी धुंधली सी हसरत से..

किसी बेदर्द किस्मत से..??

 

किसी झूठी तसल्ली से…

 

मुहब्बत हो ही जाती है….!!!

मुहब्बत हो ही जाती है….!!!

 

244 Total Views 3 Views Today

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *