#Kavita by Kavi Ajay Sharma mevara

मैं सेवक हूँ और सेवा मैं एक बात बताया करता हूँ,
जो मेरा ये दिल कहता है,बस उसे सुनाया करता हूँ।

हम सोते रहे बे लड़ते रहे,लेकिन उनका सिर झुका नहीं।
वे नहीं हटे पीछे डरकर, जबतक उनका सिर कटा नहीं।।

जब आयी दीवाली धूमधाम,हमने तो चलाये  फटाके थे।
लेकिन क्या आप जानते हो,वो भी कर रहे धमाके थे।।

उनका परिबार तपष्वी था, ना खाई चैन से रोटी थी।
क्या उसको आप जानते हो,जो हर पल याद में रोती थी।।

एक था योद्धा अब्दुल हमीद,कौसल उसने कर दिखलाया।
अपने साहस,चतुराई से,पैटन टैंकों को जला डाला।।

बो भगत सिंह राजगुरु हुए,और हिला दिया अंग्रेज़ी स्तंभ।
बिन जान लिए , बिन पात किये न्यायालय में फेंक दिया जो बोम्ब।।

बलिदान दिया था वीरों ने भारत आजाद कराने को।
अब आपकी बारी आई है,कुछ करने और दिखाने को।।

बीर शहीद हुए ताकि हम , पढ़ें लिखें और मान करें।
बिन जातिपाति के भेदभाव हम सबका ही सम्मान करें।।

ऐसे बलिदानी वीरों को,मैं शीश झुकाया करता हूँ।
जो मेरा ये दिल कहता है,बस उसे सुनाया करता हूँ।।

कवि अजय शर्मा मेवरा
ग्वालियर(म.प्र.)
7610661636

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