#Kavita by Kavi Gopal Vaishnav

व्यथा 

 

टूटा दिल टूटे सपने

व्यथा लिखूं अब कैसे

बैठ किनारे सोच रहा हूं

लिखूं क्या और कैसे..??

टूटा दिल……..

 

नजर घूमी और आसमान पर

जाकर बोली हमसे

देख नजारा अासमान का

टूट रहा है तारा

टूटे दिल……

 

फिर भी सारे चमक रहे हैं

टिमक-टिमक कर बोल रहे हैं

मत घबराओ प्यारे

जीवन का तो अर्थ यही है

कुछ आते, कुछ जाते ।

टूटा टिल टूटे सपने…..

 

फिर मैंने खुद को समझाया

खुद ही खुद में ज्ञान बढ़ाया

टूटे दिल को एक कराया

अपना जीवन सफल बनाया

टूटा दिल टूटे सपने

व्यथा लिखूं अब कैसे…!!

 

     – कवि गोपाल वैष्णव

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