#Kavita by Kavi Kailash Soni ‘sarthak’

एक गीत मात पिता पर

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मात पिता की बड़ी अनोखी माया है…

 

दो हाथों से बजती है जैसे ताली

मात पिता दोनों से मिलती खुशहाली

बच्चों की खुशियों में गुजरा है जीवन

मात पिता से महके है अपना आँगन

 

हर जीवन के पीछ़े इनका साया है

मात पिता की बड़ी अनोखी माया है

 

पापा बापू नाम पिताजी छाये है

बापू ने खुशियों के गीत सुनाये है

हमें सिखाया कैसे जीवन है जीना

सुख का गंगाजल हमको कैसे पीना

 

सबक पिताजी ने हर भला बताया है

मात पिता की बड़ी अनोखी माया है

 

मात पिता की सेवा से आयाम मिले

इनकी सेवा से दुनिया में नाम मिले

जिसके सिर पे इन दोनों का हाथ रहा

सच कहता उसके सँग ही नाथ रहा

 

इनकी सेवा करके मन इतराया है

मात पिता की बड़ी अनोखी माया है

 

आज पिता की महिमा मिलकर गायेंगे

चरणों में इनके हम शीश नवायेंगे

यही रूप तो हर बलिदान दिलाता है

सुखी रहे परिवार यही मन भाता है

 

नमन पिता को जीवन हमें दिखाया है

मात पिता की बड़ी अनोखी माया है

कैलाश सोनी सार्थक  –  हास्य व्यंग्य गीतकार

 

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