#Kavita by Kavi Krishan Kant Dubey

प्रार्थनाएँ बहुत होती हैं

दिन-रात लोग हाथ जोड़कर

तुम्हारे सामने खड़ें होकर

गुन-गुनाते हैं मंत्र

और तुम आँखें मूँदें चुपचाप बैठें रहते हो.

 

तुम्हारी समाधी देख समझ में नहीं आता

कि तुम सुन रहे हो

या सब कुछ सुनकर अनसुना कर देते हो,

फिर भी लोग

तुम्हारी सूरत का स्मरण कर

हाथ जोड़े

सर झुकाएँ

अपनी स्वर लहरियों से खूब गाते हैं प्रार्थनाएँ.

 

आस्थाओं और श्रद्धाओं के पुल पर सवार हो

भवसागर पार उतरने की लालसा लेकर

तुम्हारे मंदिर के आँगन में खड़े होकर

सुबह-सुबह आ जाते हैं लोग/और

अनगिनत उमींदों की गठरी लादे

जपते हैं तुम्हारे मंत्र

गाते हैं  तुम्हारे गीत

कि शायद कभी सुन लो याचनाओं के स्वर

और बना दो जिंदगी.

*      *

डॉ.कवि कृष्ण कान्त द्विवेदी

कन्नौज

मो.८००४८६७९३७

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