#Kavita by Kavi Nadeem Khan

अब भी जालिमों की तरफदारी कर रहा है इंसान

तू कितना बदल गया हिंदुस्तान तू कितना बदल गया हिंदुस्तान

फसलें बर्बाद हो रहीं हैं कारोबार भी चौपट है

फिर भी विदेशों में घूम रहा लगता है ये नेता फौकट है

कारोबारी कर्जा लेकर भाग रहे खुदकुशी कर रहे किसान

तू कितना बदल गया हिंदुस्तान तू कितना बदल गया हिंदुस्तान

कुर्सी के ठेकेदारों के कारण पैदा मंगल लक्ष्मी अब्दुल हमीद नहीं होते

मेरे मुल्क के वीरों की खुशियों के दिवाली और ईद नहीं होते

सरहद पर रोज जान गवा रहा वीर जवान

तू कितना बदल गया हिंदुस्तान तू कितना बदल गया हिंदुस्तान

गरीबों से रिश्वत लेते अफसर चन्द नोटों की खातिर

कई वर्गों में बांट दिया इंसाँ को चन्द वोटों की खातिर

कब खत्म होगा भ्रष्टाचार आरक्षण कब होगा जनरल पर ये अहसान

तू कितना बदल गया हिंदुस्तान तू कितना बदल गया हिंदुस्तान

ज़िक्र करता हूँ एक और बड़ी बीमारी का

क्या करें अब साहेब बढती बेरोजगारी का

आजाद होकर भी दर दर की ठोकर खा रहा नौजवान

तू कितना बदल गया हिंदुस्तान तू कितना बदल गया हिंदुस्तान

उठ जाग अब अपना रुप बदल ले

सारी बुराइयों को अब तू निगल ले

इल्तिजा कर रहा है नदीम अनुज खान

तू कितना बदल गया हिंदुस्तान तू कितना बदल गया हिंदुस्तान

By: Nadeem Khan Anuj

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