#Kavita By Kavi Om Singh

है करता बेटा माँ को सलाम।

न पेट भरे भोजन चाहे,

न नींद रात्रि को आये।
माँ पर आये जब कष्ट कोई,
तो लाल उसका टकराये।

नहीं और मंगता कुछ तुम से
बस देश भक्त में कर दो नाम

है करता बेटा माँ—————
रब सारी खुशीयां ले जा तू,
बस इतनी दुआयें दे-जा तू।
मैं मरुँ देश रच्छक बनकर,
होठों पर भरत का ही हो नाम।
है करता बेटा———-

मैं भाग हजारों कट जाऊँ,
लाखों टूकड़े में बंट जाऊँ

न करूँगा कोई सिकवा गिले,
यदि हर टूकड़े में भारत नाम मिले।

मेरे जीवन के हर पल में
होगा ओ सबसे अमूल्य काम।
है बेटा——–

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