#Kavita by Kavi Om Singh Faijabadi

ये जीवन है एक महायुध्द यहाँ का हर बात निराला है।

कोई हंसता कोई रोता है कोई भूंखा कोई गाता है।

 

कोई राम नाम पे दे गाली कोई राम राम चिल्लाता है।

 

कायर का हर पथ दुर्धर है वीरों का जंगल ही घर है।

 

न दिखे काम प्रशस्त कोई सब कुछ दिखता कटु प्याला है।

 

ये जीवन- — – — — – – – – –

 

हमको दुनिया धूसर दिखती क्यों टूट गया सारा सपना।

 

ओ ही निकला बेगाना अब जिनको कहता था मैं अपना।

 

लाखों लोगों के झौरों में मैं खुद को अकेला पाता हूँ।

 

जब यादें उनकी आती हैं तो ही महफिल में गाता हूँ।

 

जीवन की उनीदीं हर घड़ीयाँ क्यों नींद नहीं आती मुझको ।

 

जीवन को अकेला करने वाले बोल जरा क्या दूँ तुमको।

 

सब “ओम” “ओम” चिल्लायेंगे ओ पल भी आने वाला है।

 

ये जीवन है– – — – — — — — —

 

अंगार भरे हो राहों में पर मंजिल तक हम जाएंगे।

 

 

तब तेरे ही बच्चे  यारा ओम ओम चिल्लायेंगें

 

हिम्मत रख्खेगा जब कोई तो तिमिर बनेगा उजाला।

 

विश्वास अडिग था मीरा का जो पी गयी विष का प्याला।

 

 

 

सच्चा प्रेमी हूँ मंजिल का पग अविरल बढ़ने वाला है

 

ये जीवन – – – – – –      —- – – –

 

– kavi om singh faizabadi

 

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