#Kavita by Kavi Piyush Sharma

घनाक्षरी छंद  देश की ज्वलन्त वेदनाओं पर

 

भभक रही है आग,नगर गाँव ढाणी में

फूंक दिये घर आज,आरक्षण तृष्णा में

 

आसमाँ चीरती चली,विनाश की हवाओ से

लहू-लुहान हो रहा,आज अतितृष्णा में

 

कराहती व चीखती,रक्त की हर गली है

मनुज विवेक हीन,पद भवतृष्णा में

 

जलन का दर्द उठे,काँपती है वसुन्धरा

चँगेज़ दहक उठा,यहीं भोगतृष्णा में

 

(बिना तोड़ मरोड़ किए आगे शेयर करे)

–कवि पियुष शर्मा”परिंदा”

–बारां(राजस्थान)

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