#Kavita by Kavi Piyush Sharma

मनहरण घनाक्षरी छंद

—कवि पियूष शर्मा”परिंदा”

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एक धर्म एक देश एक यहाँ परिवेश

भिन्नता का भाव कोई मन में न लाइए।

भारतीय एकता का लिए हुए परचम

एक एक भारतीय आगे बढ़ आइए।।

देश के विकास हेतु लिखो नई परिभाषा

स्वर्ण चिरैया फिर से देश को बनाइए।

पक्ष या विपक्ष में हों राष्ट्र-हित सर्वोपरि

विभाजनकारी राग देश में न गाइए।।

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