#Kavita by Kavi Piyush Sharma

अतुकांत रचना

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भूखे सो जाते

पर खुश है हम आज

निर्धन ही सही

आंनद ही मिलता है

किसी के गुलाम नही

पर अपने मन के है

मेले शर्ट नंगा तन

रोटी हाथ मे उनके

फिर भी आनंद के पल

रोटी के एक टुकड़ा भी

रात भर नींद देता उनको

अगली सुबह फिर उठते

निकले उसी मन से

रोटी मिलती बाटते

एक टुकड़ा भी नही गिरे

ध्यान इस बात का रखते

पर आनंद में वो आज जीते

नंगे पांव चलते

उसी मन से रोटी का टुकड़ा ना गिरे

जहाँ हाथ मे थैला हो

पढ़ने का जनून हो

वहाँ रोटी की तलाश

यही बचपन अड़चन बना

देखा जाने कितने अपने

समय बलवान था

बस नजरिया बदला

 

##पीयूष शर्मा”परिन्दा”

[6:25 PM, 3/11/2018] Kavi Piyush Sharma, Rajasthan

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