#Kavita by Kavi Rajesh Purohit

खेलो होली

 

प्रीत के रंगों से खेलो।

आस्था से आज होली।।

 

लाल नीली और पीली।

रंग बिरंगी आज होली।।

 

टेसू कैसा दहक रहा है।

नव उमंग से खेलो होली।।

 

ढोल ढफली चंग बाजे।

नाचो कूदो आई होली।।

 

मंजीरों की तान पर नाचे।

अबीर से खेले सारे होली।।

 

भाईचारे से गले मिले सब।

गुलाल मल खेले होली।।

 

बैरभाव मन से मिटा दे।

प्रेम रंग में भींग खेले होली।।

 

फागुन की मस्ती में झूमें।

मिलकर खेले सारे होली।।

 

गुझियाँ पापड़ और कचोड़ी।

खाओ जी भर आईं होली।।

 

मीठे मीठे शक्करपारे सजे।

मेहमानों की आई टोली।।

 

मीठा सबका मुँह कराओ।

मिठास भरने आई होली।।

 

प्राकृतिक रंगों से खेलो।

इस बार सब मिलकर होली।।

 

रसिया गाओ बृज के सारे।

गुलाल उड़ाओ आई होली।।

 

लट्ठमार खेले सब होली।

मथुरा वृंदावन की होली।।

 

गोपी ग्वाल बने इतराये।

बृज की देखें आओ होली।।

 

शांति सदभाव से रहो सभी।

मिलकर खेलें फिर से होली।।

 

चंदन अक्षत अबीर गुलाल।

खूब उड़ाती आई होली ।।

 

कवि राजेश पुरोहित

भवानीमंडी

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