#Kavita by Kavi Rajesh Purohit

बसंत

ऋतु बसंत की आई।

नव उमंग मन में लाई।।

खिल उठी कली कली।

बिखेरती खुशबू चली।।

चम्पा जूही और चमेली।

झूम उठी क्यारी क्यारी।।

लाली सुषमा और रहीम।

खेल खेल बारी बारी।।

लगती बसंत की है तैयारी।

कहने लगी नानी प्यारी।।

पतझड़ तो फ़ुर्र हो गया।

ली बसंत ने जब अंगड़ाई।।

रवि रश्मियाँ उतरी भू पर।

देखो कैसी धूम मचाई।।

कम्बल कोट संदूक में दुबके।

लाज से भींगी खूब रज़ाई।।

बैठ के आगे सिगड़ी के।

बूढ़ी काकी नजर न आई।।

दौड़ लगाकर भागी सर्दी।

देखो ऋतु बसंत की आई।।

कोयल कूके डाली डाली।

आम्र कुंज में खेले लाली।।

सरसों के पीले पुष्पों से।

खेतों की महकी है क्यारी।।

कवि राजेश पुरोहित

98,पुरोहित कुटी . श्रीराम कॉलोनी . भवानीमंडी – पिन 326502

 

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