#Kavita by Kavi Santosh Kumar Preet

मन की भाषा की होती अनुवाद है।

गीत ग़ज़ल कविता सब दिल के नाद है।।

 

चुन चुन कर के शब्द सुमन से हार बने,

सुर की बहती नदियां की फिर धार बने।

दिल को छू जाए ऐसी रचनाओ की,

जज्बातो की आंधी ही आधार बने।।

सागर की लहरों सी उठती रहती है,

कवि हृदय तो भाव से आबाद है।

 

सोये हुए जज्बातो में हलचल कर दे,

संगदिल को भी अपना ये कायल कर दे।

शेरों की तासीर ये हमने देखी है,

कितनो को दीवाना और पागल कर दे।।

सुर की सरिता जहाँ कहि भी बहती है,

वातावरण में छा जाए उन्माद है ।

 

हृदय के है उदगार ये केवल बोल नही,

दिल के जज्बातो का कोई मोल नही।

चाहे दौलत में कुछ भी तोला जाए,

दौलत में हो सकती इनकी तोल नही।।

स्वाभिमान से बढ़ कर ‘प्रीत’ रचयिता को,

दुनिया की कोई भी नही इमदाद है।

 

सन्तोष कुमार ‘प्रीत’

वाराणसी

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