#Kavita by Kavi Sharad Ajmera Vakil

यूं ही मोबाइल से दिल ना समझाया करो.

हकीकत में नहीं तो ख्वाबों में आया करो..

 

रूठने मनाने से बढ़ती है दिल में मोहब्बत.

कभी तुम रूठो,कभी मुझे तुम मनाया करो..

 

छोटी छोटी बातों पर मुँह फुला कर तुम

इस अदा से खुद को कभी तुम सजाया करो..

 

तुम्हारे गालों के रिंकल बने हैं मेरी जिंदगी.

कभी कभी बिना बात के भी शरमाया करो..

 

खिल जाओ कली बन कर फिजा में तुम.

भीनी भीनी खुशबू से मुझे महकाया करो.

 

यादों के काफिले सोने नहीं देते “”वकील””

कब मिलोगे,अब तो यूँ ना सताया करो..

 

……….””वकील””

 

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