#Kavita by Kavi Sharad Ajmera Vakil

माँ

मेरी माँ

केसे बताऊं

केसे समझाऊं

तुम जरूरी हो

मेरे लिये

मुझे याद आती है

तुम्हारी

तुम्हारा मुस्कराते

जगाना,उठाना

खेल- खेल में

दोड़-दोड़के

मुझे बड़ा कर दिया

इतना बड़ा कि

अब तुम मुझसे दूर हो

बहुत दूर

क्यों

में चाह कर

नहीं साथ पा सकता

लेकिन तुम हो सदा पास

चमकती ओस

मुस्कराती सुबह

गुनगुनी धूप

सुनहरी शाम

चांदी सी चांदनी

वो चन्दा मामा

चूड़ी की खनक

पायल की रून झुन

बचपन के  किस्से

मेरा रूठना

तुम्हारा मनाना

सब आस पास पर

……..खामोश

……केवल य़ादे ….सुनहरी यादे

“”वकील””***

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