#kavita by Kavi Sharad Ajmera Vakil

बूड़े हैं ,बीमार हैं ,लाचार हैं माँ बाप

राह तकते ,देखने को तरसते पता कर लो

तुम्हारी चेन की नींद ओर अाराम पर

निछावर की जागते हुए कितनी रात

……..पता कर लो

तुम्हारे खिलोनो ख्वाहिशो का तुम्हे क्या पता

अपनी साडी,गहने,लालसांओ कोभी  मारा

………पता कर लो

बडाने को तुम्हारे जीवन की सांसो को

अपनी सांसो  में  कितना  ज़हर  पिया

………पता कर लो

कहै ” वकील”सुनो मेरे मन की बात भाई

राह तकते ,देखने को तरसते,वो माँ बाप हैं

………..पता कर लो

 

***””वकील “”**

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