#Kavita by Kavi Sharad Ajmera Vakil

तू कैसा है
एक सवाल हजारों लाखों जवाब
एक दूसरे में गुत्थमगुत्था
कर्मकांड के चक्रव्यूह में
फंसे हुए
उन जवाबों में खुद को उलझाता
मैं एक छटपटाहट लिए
अलग-अलग रंग में
भाषा में
परिधान में
क्रिया में
ढूंढता रहा बाहर
हां बाहर
आयतनों में… नदियों में…. पर्वतों पर
भटकता रहा
फिर आई एक आवाज अंदर से
देख तू भीतर
और तू भी तर

***””वकील””**

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