#Kavita by Kavi Sharad Ajmera Vakil

अधूरा प्रणय निवेदन””

 

नहीं कर सका

व्यक्त

अपने प्रेम को

बैठा रहा

वक्त की मुंडेर पे

करता रहा प्रतीक्षा

स्मृति तुम्हारी सजाये

लिये प्रणय पूरित ह्रदय

अनुराग मन में अपार

प्रणय पाश में बंधा

बन कर प्रेम पथिक

हे

मधु मोहिनी

प्रमुदिता

लालायित

तुम्हें पाने को

रहा तन पर

मन तुम्हारे पास

अभी भी

राह तकता

लिये वो ही

बिखरा सपना

 

**””वकील “”*

 

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