#Kavita by Kavi Sharad Ajmera Vakil

फुटपाथ पर लेटा
वो प्यारा छोटा बच्चा
चांद के रोटी समझ कर
अपनी भूख भड़काता रहा
राहगीर आते जाते रहे
जब तक रोटी
उस बच्चे की नाक की
सीध में नहीं आई
पर अपनी आपाधापी में डुबे राहगीर
पढ़ ही नहीं पाऐ उसकी भूख
और
सूरज ऊगते ऊगते
डूब गया चांद
मौत के आगोश में

**”वकील”**

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