#Kavita by Kavi Shivam Sharma

लहू सीमा पर बहाकर..जिंदा रहे

वह वतन के बन दिवाकर..जिंदा रहे
वह बने इतिहास तलवारें चलाकर

हम गीत गजलें गाकर..जिंदा रहे
नफरत फैलाने वाले सब मर गये

लोग मोहब्बत बांटकर..जिंदा रहे
आई परेशानी जरा सी मर गये

वीर लाखों दर्द सहकर…जिंदा रहे
सुन “शिवम” संघर्षों से डर भागे जो

वह भी  क्या जिंदा होकर…जिंदा रहे

कविशिवमशर्मा – मुरैना म.प्र मो.–9907345498

One thought on “#Kavita by Kavi Shivam Sharma

  • November 16, 2018 at 11:30 am
    Permalink

    Shadu bhes dar – dar ke luta hai dhara ko
    chirkar maa ka kaleja na sarminda rhe

    Dekh in ko matra bhumi ke dhurandhar
    Bolte kya khak ham jinda rahe

    Bhot sandar likha hai pandit ji dil jit liya

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