#Kavita by Kavi Yasvant Patidar

पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

*जिसने मुजको जन्म दिया है।
जिसने मुजको पाला है।।
वो मेरे आँखों के काजल।
वो ही अमृत का प्याला है।।1।।

जिसने थक कर भी देखो।
कंधे पर मुझे बैठाया है।
जिनके पेरो में छाले थे ।
फिर भी मुझे गुमाया है।।2।।

जेब में ना थी फूटी कोडी।
फिर भी में धनवान था।
मेरे सर पर हाथ पिता का।
में सबसे शक्तिमान था।।3।।

कभी नही में हारा तब तक।
साथ जो पिता तुम्हारा था।
अब तो किस्मत भी रूठी है।
बस साथ आपका प्यारा था।।4।।

कैसे लिखु  में अपने अरमां।
अब तो कलम भी रोती है।
क्या लिखूं अब पिता पर ।
जो पालन पोषण और रोटी है।।5।।

बहुत याद है आती आपकी।
कैसे में अब बतलाऊ।
मेने जबसे दिल दुखाया।
कैसे अब आपके सामने में आऊ।।6।।

पिता ही वह मूरत है ।
जिसकी मै पूजा करता हूँ ।
मेरा अब भी एक पल नही कटता।
हर पल में दुआ करता हूँ।।7।।

कोई तो यह पैगाम दो ।
अब मेरी दीवाली नही दीवाला है।
बचपन से अब तक।
मुजको शहजादे सा जिसने पाला है।।8।।

अब मे होली राखी नही दीवाली मनाता हूँ।
जो आपकी यादें है बस वही में दोहराता हूँ।
अब तो बस चरणों में आपके जगह दे दो।
में उसी स्वर्ग में  रहना चाहता हूँ।।9।।

*आप से में भी दूर नही।
आप ही मेरे जहान हो।
बस आप समंदर में हूँ दरिया।
आप ही मेरे भगवान  हो*।।10।।
कवि -यशवंत पाटीदार S/O गोपीलाल जी

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