#Kavita By Kirti Tiwari

रंगों के संग नीलगगन में,
हंसी ठिठोली खुशियां उड़ती.
हर चेहरे पर रंग लाज का,
हर अंगना अठखेलियां उठती.
अपनेपन के रंग रँगते सब
काश! कि होली ऐसी होती…
रंग प्रेम का बिखरा रहता,
मुस्कानों की टोली होती.
रंग हंसी का होता चहुदिश,
हर अंगना रंगोली होती,
हंसी ख़ुशी से खिल जाते सब,
काश ! कि होली ऐसी होती…
श्वेत रंग न होता दुःख का,
अजब ढंग ही होता सुख का,
नफ़रत के हर रंग धूल जाते,
मिश्री शहद सी बोली होती,
फगुनी बयार में खिल जाते सब,
काश! कि होली ऐसी होती…
#कीर्ति

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