#Kavita by Kishan Kumar Saini

धरती पुत्र किसान

 

हाँ!

मैं सर

उठा कर

कहता हूँ कि

यही किसान होता है

धरती का असली बेटा

जिसने अपने खून पसीने से

धरती माँ को सींचा और दिन-रात

कर रहा है मेहनत अपने लिए और हमारे लिए।

अगर

किसान ना

होता तो हम

सभी भूखे मर

जाते और बारिश

के बरसते ही इसका

चेहरा खिल जाता है

मन प्रसन्न हो जाता है,

और तन तंदरुस्त हो जाता है।

और जब पड़ती है पाले की मार

तो आँखों से बहती हैं आसूं की धार।

इतना व्यतीत होता है और कहता है कि

अब कैसे भरूंगा पेट औरों का और अपने बेटों का।

 

कृष्ण कुमार सैनी”निशान्त” दौसा,राजस्थान मोबाइल~97855~23855

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