#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

लड़ाते क्यों हो……

–––––––––

भाई को भाई से लड़ाते क्यों हो

आपस में एक दूसरे को भिड़ाते क्यों हो

 

रहने  दो  अमन  शान्ति  यारों

ये नफरत के झंडे गड़ाते क्यों हो

 

फुट डालो राज करो  खुदगर्जी है

आपसी में विवाद बढ़ाते क्यों हो

 

राजनीती   मतलब  परस्ती  है

खंजर तो कभी बन्दुक अड़ाते क्यों हो

–किशोर छिपेश्वर”सागर”

भटेरा चौकी बालाघाट(म.प्र.)

Leave a Reply

Your email address will not be published.