#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

त्यौहार लगता है….

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घर घर जले दीप

दीपावली का त्यौहार लगता है

गले मिलते है तो

प्यार प्यार लगता है

सज गई ये दिशाएं हो रही रोशनी

नजारा ये बहार लगता है

मिला हो प्यार मोहब्बत और खुशियां

खुश परिवार लगता है

सितारें उतर आए हो

आसमां से जमीं पर जैसे

जगमगा रहे दीप

सजा घर द्वार लगता है

दे रहे शुभकामनाये और बधाई एक दूजे को

बहुत प्यारा है मेरा दिलदार लगता है

यही दुआ है बिखरती रहे चमन में खुशियां “सागर”

खुशियों भरा ये संसार लगता है”

धनतेरस दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं

किशोर छिपेश्वर”सागर”

बालाघाट(मध्य-प्रदेश)

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