#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

अब और समझौता होता नहीं

इंतजार भी होता नहीं

मन की बाते छोड़ दो

करना पड़ेगा ऐलान जंग

सब्र हमसे अब होता नहीं

नमी रहती है आँखों में

शहीद का परिवार

चैन से सोता नहीं

नारे बाजी भाषण बाजी से

कुछ होता नहीं

उठा लेने दो कलम भी

और बन्दुक भी

ऐसा नहीं कि दिल

हमारा रोता नहीं

किशोर छिपेश्वर”सागर”

बालाघाट

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