#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

 

रिश्ते वजूद क्यों खोने लगे

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सुकून चैन अमन की बात करता हूँ

इस तरह मैं मन की बात करता हूँ

 

मुझे शिकायत नही किसी से भी

मैं अपने वतन की बात करता हूँ

 

वो भूखे रोटी को तरसते बच्चे

खुले हुए तन की बात करता हूँ

 

कहाँ गए वो वापस लाने वाले

उस काले धन की बात करता हूँ

 

समस्या घिरती रही बेबस परेशान

वो  आम जन  की  बात करता हूँ

 

रिश्ते वजूद क्यों खोने लगे अपना

मैं उस  पतन  की बात  करता हूँ

-किशोर छिपेश्वर”सागर”

बालाघाट(मध्य-प्रदेश)

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