#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

शिव वंदना

 

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शिव ही शक्ति शिव ही भक्ति

करते बेड़ा पार है

पूरी होती मनोकामना

शिव के ही उपकार है

 

पिया जिसने विष का प्याला

किया दुष्टों का संहार है

गले मे जिसके नाग की माला

शृष्टि के पालनहार है

 

जटाधारी त्रिशूल हाथ मे उनके

जटा में गंगा धार है

जीत ही जिसके हिस्से में है

नही कभी भी हार है

 

बोल बम के नारों से ही

भक्तों की ही पुकार है

शिव की करते आराधना

पूजा भी स्वीकार है

 

पार्वती अर्धांगनी जिनकी

श्रीगणेश के दुलार है

हम भक्तो के रखवाले है वो

सुखमय अब संसार है

 

-किशोर छिपेश्वर”सागर”

बालाघाट(मध्य-प्रदेश)

 

 

 

 

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