#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

नाम तेरा ही पुकारता रह गया

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दर्द की तड़प से कराहता रह गया

नाम  तेरा  ही  पुकारता रह  गया

 

टूट गए वो दौरे जीत के सिलसिले

और  मैं  बस  हारता  रह  गया

 

नींद आंखों  में  अब  नहीं  आती

तेरी तस्वीर को निहारता रह गया

 

वास्ता रहता नहीं अब महफ़िल से

तन्हाई में दिन गुजारता रह गया

 

सीखने लगा दर्दे शायरी का फन

अल्फाज अपने निखारता रह गया

 

-किशोर छिपेश्वर”सागर”

बालाघाट

 

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