#Kavita by Kishor Chhipeshwar Sagar

मस्जिद तो कहीं शिवाले मिलेंगे

किस्मत में होगा तो निवाले मिलेंगे

 

सिख लिया मेहनत का हुनर यारों

माना पावों में मेरे भी छाले मिलेंगे

 

ये अंधेरे कब तलक डराते रहेंगे

यही उम्मीद एक दिन उजाले मिलेंगे

 

भरोसा करता हूँ अपनी बाजुओं पर

जानता हूँ लोग तो दिल के काले मिलेंगे

 

वो बुलाते है घर में किसी मतलब से

देखा है निकलो तो जड़े ताले मिलेंगे

 

सुकून तो मेरे गाँव मे मिलता है यारो

शहरों में ऊँची इमारत कई माले मिलेंगे

 

समुंदर के पानी से प्यास बुझती नहीं

काम मेरे आएगी नदियां नाले मिलेंगे

 

-किशोर छिपेश्वर”सागर”

बालाघाट

 

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